मनुष्य का एक चान्द्रमास पितरों का एक अहोरात्र होता है। मनुष्य का कृष्णपक्ष पितरों का दिन होता है,एवं शुक्लपक्ष रात्रि। कन्या राशि में सूर्य के स्थित होने पर आश्विन कृष्ण पक्ष पितृपक्ष के रूप में मनाया जाता है। यह पक्ष देव-ऋषि-पितृ-तर्पण एवं पितरों के श्राद्ध के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होता है। समन्त्रक प्रदत्त जल.. read more →

इस वर्ष आषाढ़ अधिक मास है। यह १७ जून से लेकर १६ जुलाई तक है। लोक में अधिकमास को पुरुषोत्तम मास अथवा मलमास कहते हैं। अधिकमास में विवाह, मुण्डन, यज्ञोपवीत, गृहारम्भ, गृहप्रवेश, वेदव्रत, वृषोत्सर्ग, वधूप्रवेश, दीक्षा, उद्यापन, महादान, मंदिरनिर्माण, यज्ञकर्म नहीं किया जाता है। अधिक मास में तीर्थश्राद्ध, वार्षिकश्राद्ध, शिवविष्णुकीपूजा करने का विशेष महत्त्व है।.. read more →

श्रावण मास भगवान् शिव का मास है।  अत: सोमवार के दिन व्रत रहकर शिव-पार्वती की पूजा करने से धन-धान्य एवं शिवकृपा की प्राप्ति होती है। यह व्रत दिन-रात्रि उपवास करके अथवा केवल दिन में उपवास करके प्रदोष काल में शिव की आराधना कर पारणा के साथ पूर्ण किया जाता है। श्रावणमास में कर्वâ राशि में.. read more →

वृष्टि परीक्षण १४ जून से लेकर १२ जुलाई तक आषाढ़ मास है। यह मास वर्षा ऋतु का प्रथम मास है। यदि इस मास में मानसूनी वृष्टि न हो, तो सूखा पड़ने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। आचार्यों ने इस मास में पाँच प्रकार से वृष्टि परीक्षण करके सुनिश्चित किया कि कितनी वृष्टि होगी? एक.. read more →

डॉ. कामेश्वर उपाध्याय महासचिव अनेक जिज्ञासुओं, मित्रों एवं शिष्यों ने मुझसे पूछा- राष्ट्र संवर्धन के लिए यज्ञ क्यों? अमेरीका तथा यूरोप के लोग राष्ट्र संवर्धन के लिए यज्ञ नहीं करते फिर भी उनका देश संवर्धित है। ऐसा क्यों? यह एक सहज परिप्रश्न है। परिप्रश्न होने से भी राष्ट्र संवर्धन होता है। ऐसे प्रश्नों के उत्तर.. read more →