श्रावण मास भगवान् शिव का मास है।  अत: सोमवार के दिन व्रत रहकर शिव-पार्वती की पूजा करने से धन-धान्य एवं शिवकृपा की प्राप्ति होती है। यह व्रत दिन-रात्रि उपवास करके अथवा केवल दिन में उपवास करके प्रदोष काल में शिव की आराधना कर पारणा के साथ पूर्ण किया जाता है। श्रावणमास में कर्वâ राशि में सूर्य एक मास तक रहता है। कर्वâ राशि का अधिपति चन्द्रमा है। यह चन्द्रमा भगवान् शिव के मस्तक पर विराजमान होने के कारण निरन्तर सोमतत्त्व प्रदान करता है। अत: श्रावण मास भगवान् शिव को अत्यन्त प्रिय है। श्रावण मास में किसी भी पुराण प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग या द्वादशज्योतिर्लिंग क्षेत्र में सोमवार व्रत कर शिव के अभिषेक से जीवन में सबकुछ मिलता है। सोमवार की ही तरह मंगलवार के दिन उपवास रहकर गौरी की पूजा करने से विवाह की बाधा दूर होती है-
सोमवारव्रतं कार्यं श्रावणे वै यथाविधि:।।
शत्तेâनोपोषणं कार्यमथवा निशिभोजनम्।।
सोमवार व्रत का समस्त विधान प्रदोष व्रत की तरह होता है। प्रदोषव्रत में ‘‘निराहारीभवेद् दिवा’’ दिन में व्रत करके रात्रि में पारण किया जाता है। सोमवार के दिन शिवार्चन करने से कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता। यह व्रत ब्रह्मचारी, कन्या, पति-पत्नी (गृहस्थ) अथवा किसी भी अवस्था का व्यक्ति कर सकता है।
नागपंचमी-
श्रावणशुक्लपक्ष की पंचमी तिथि नागपंचमी कहलाती है। आज के दिन सर्पों की पूजा की जाती है। अनन्त आदि प्रख्यात नागों की पूजा दूध, घी, नैवेद्य, दधि, दूर्वा, कुशा, गन्ध, पुष्प आदि से करके प्रार्थना की जाती है कि ‘हमारे जीवन में सर्पों का भय न हो।’ आज के दिन गोबर के सर्प बनाकर भी पूजे जाते हैं। घर के मुख्य दरवाजे के दोनों पाश्र्वों में नागों के चित्र सटाते हैं अथवा गोबर से नागों की आकृति बनायी जाती है। भक्तिपूर्वक नागपंचमी के दिन सर्पपूजा करने से जीवन में सर्पभय नहीं होता है।
भविष्यमहापुराण में वर्णित है कि मनुष्यों को प्रत्येक पञ्चमी तिथि में नागों की पूजा करनी चाहिए। श्रावणशुक्लपक्ष की पञ्चमी तिथि के दिन मुख्य दरवाजे के दोनों पाश्र्वभागों में गोबर से साँप की आकृति बनाकर दही, दूर्वा, अक्षत, कुश, गंध तथा पुष्प से पूजा करनी चाहिए-
श्रावणे मासि पञ्चम्यां शुक्लपक्षे नराधिप।।
द्वारस्योभयतो लेख्या गोमयेन विषोल्बणा:।।
पूजयेद् विधिवद्द्वारं दधिदूर्वाक्षतै: कुशै:।।
गधपुष्पोपहारैश्च ब्राह्मणानां च तर्पणै:।।
ब्राह्मपर्व, ३६/६२-६३
रक्षाबन्धन-
श्रावणशुक्लपूर्णिमा के दिन रक्षा बन्धन का पर्व मनाया जाता है। आज के दिन बहनें भाईयों के कलाई में रक्षा (राखी) बाँधती हैं। रक्षा बन्धन का मंत्र इस प्रकार से है-
येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबल:।।
तेन त्वामभिध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
रक्षाबन्धन पर्व हमेशा भद्रारहित पूर्णिमा में मनाया जाता है।

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